Tuesday, February 3, 2026

छोरे हुए घर

कुछ जोड़े हुए घर, कुछ छोड़े हुए घर
मेहनत की मिट्टी से मोरे हुए घर,
किसी वक़्त मज़बूती से हमारा कहलाने वाले घर,
दरारों के चलते मेरा और तुम्हारा हो जाने वाले घर।
ख़ुशियों की दीवाली से रौशन हुए घर,
कुछ अपने हुए घर, कुछ पराए हुए घर,
सब निकल पड़े हैं इस दौर में
सपनों का घर सँवारने,
पीछे रह गए हैं—
कुछ छोड़े हुए घर,
कुछ जोड़े हुए घर।

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सिंदूर

अंधियारे की ओर बढ़ा, सूरज क्षितिज से दूर था,  चंद्रिमा रात को निकला, चांद भी बेनूर था  किसी का भाई रहा सोया, मिटा किसी का "सिंदूर"...